पर्सनल फाइनेंस
.png)
4 min read | अपडेटेड February 03, 2026, 18:19 IST
सारांश
Share Buyback: फाइनेंस बिल 2026 में प्रस्ताव रखा गया है कि अब बायबैक से मिलने वाला पैसा डिविडेंड नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे कैपिटल गेन माना जाएगा। इसके साथ ही प्रमोटर्स पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा ताकि वे बायबैक का इस्तेमाल कम टैक्स देकर कंपनी से पैसा निकालने के लिए न कर सकें।

Share Buyback: अगर प्रमोटर कोई भारतीय कंपनी है तो बायबैक से होने वाले मुनाफे पर 22 फीसदी टैक्स लगेगा।
अब तक जब कोई कंपनी बायबैक करती थी, तो शेयरधारकों को मिलने वाला पूरा पैसा डिविडेंड माना जाता था और उस पर “Income from Other Sources” के तहत टैक्स लगता था। यानी निवेशकों को पूरी रकम पर अपनी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता था। हालांकि, बायबैक में खत्म हुए शेयरों की खरीद कीमत को सेक्शन 69 के तहत कैपिटल लॉस के रूप में दिखाया जा सकता था, लेकिन असल में निवेशकों को इसका ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता था।
फाइनेंस बिल 2026 में प्रस्ताव रखा गया है कि अब बायबैक से मिलने वाला पैसा डिविडेंड नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे कैपिटल गेन माना जाएगा। इसके साथ ही प्रमोटर्स पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा ताकि वे बायबैक का इस्तेमाल कम टैक्स देकर कंपनी से पैसा निकालने के लिए न कर सकें। नए नियम के मुताबिक, अगर प्रमोटर कोई भारतीय कंपनी है तो बायबैक से होने वाले मुनाफे पर 22 फीसदी टैक्स लगेगा, जबकि विदेशी या गैर-घरेलू प्रमोटर्स के लिए यह दर 30 फीसदी होगी।
अभी तक प्रमोटर्स के पास यह विकल्प था कि वे बायबैक के जरिए कम टैक्स देकर कंपनी से पैसा निकाल लें, जिसे टैक्स आर्बिट्राज कहा जाता है। इसका नुकसान छोटे निवेशकों को होता था। नए नियमों के बाद यह रास्ता बंद हो जाएगा और सभी शेयरधारकों के लिए एक समान टैक्स सिस्टम लागू होगा।
इस बदलाव से आम निवेशकों को बड़ा फायदा होगा। पहले स्थिति यह थी कि कंपनी जब बायबैक करती थी, तो निवेशकों को मिलने वाली पूरी रकम पर टैक्स देना पड़ता था, चाहे उन्होंने शेयर कितने में खरीदे हों। अब बायबैक को शेयर बेचने जैसा माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि निवेशक अपनी खरीद कीमत घटा सकेंगे और सिर्फ मुनाफे पर टैक्स देंगे।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने किसी कंपनी के 1,000 शेयर 200 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदे, यानी आपका कुल निवेश 2 लाख रुपये हुआ। बाद में कंपनी ने 500 रुपये प्रति शेयर पर बायबैक किया और आपको कुल 5 लाख रुपये मिले। पुराने नियमों के तहत पूरे 5 लाख रुपये आपकी इनकम माने जाते थे। अगर आप 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आते हैं, तो आपको करीब 1.5 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता था, इसके अलावा सेस और सरचार्ज अलग से लगते थे।
नए नियमों के तहत अब पहले मुनाफा निकाला जाएगा। 5 लाख रुपये में से 2 लाख रुपये घटाने के बाद आपका कैपिटल गेन 3 लाख रुपये होगा। अगर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन है, तो 1.25 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी और बाकी 1.75 लाख रुपये पर 12.5 फीसदी टैक्स लगेगा। इस हिसाब से टैक्स करीब 21,875 रुपये बनेगा। यानी जहां पहले लगभग 1.5 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता था, अब सिर्फ करीब 22 हजार रुपये देने होंगे। इस उदाहरण में निवेशक की बचत करीब 1.28 लाख रुपये हो जाती है। अगर यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होगा, तो उस पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा।
प्रमोटर शेयरधारकों के लिए नियम थोड़ा अलग रहेगा। उन्हें पहले कैपिटल गेन टैक्स देना होगा और उसके ऊपर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगेगा, जिससे कुल प्रभावी टैक्स दर भारतीय प्रमोटर्स के लिए 22 फीसदी और विदेशी प्रमोटर्स के लिए 30 फीसदी हो जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि ये सभी बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और टैक्स ईयर 2026-27 से इनका असर दिखाई देगा।
संबंधित समाचार
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।