पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड February 06, 2026, 12:19 IST
सारांश
Income tax Act 2025: अब तक अगर कोई कंपनी अपने शेयर वापस खरीदती थी, तो निवेशकों को मिला पैसा “deemed dividend” माना जाता था और उस पर normal income tax slab के हिसाब से टैक्स लगता था। 1 अप्रैल 2026 से यह पैसा कैपिटल गेन माना जाएगा।

Income tax Act, 2025: ये बदलाव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026 में घोषित किए थे।
1 अप्रैल 2026 से भारत में Income tax Act, 2025 लागू हो जाएगा। इसके साथ ही टैक्स से जुड़े कई बड़े नियम बदल जाएंगे, जिनका असर आम लोगों, निवेशकों और कंपनियों सभी पर पड़ेगा। ये बदलाव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026 में घोषित किए थे। सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है। अब जानते हैं कि क्या-क्या बदलेगा।
अब तक अगर कोई कंपनी अपने शेयर वापस खरीदती थी, तो निवेशकों को मिला पैसा “deemed dividend” माना जाता था और उस पर normal income tax slab के हिसाब से टैक्स लगता था। 1 अप्रैल 2026 से यह पैसा कैपिटल गेन माना जाएगा। मतलब अब शेयर बेचने जैसा ही टैक्स लगेगा- शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के हिसाब से।
Securities Transaction Tax यानी STT को futures selling पर 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। ये नियम 1 अप्रैल 2026 के बाद किए गए derivative contracts पर लागू होगा। इसका सीधा असर F&O traders पर पड़ेगा।
अगर आपने SGB ओरिजनल गवर्नमेंट इश्यू में खरीदे हैं, तब redemption पर टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर आपने SGB सेकेंडरी मार्केट से खरीदे हैं, तो मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ेगा। पहले ये पूरी तरह टैक्स फ्री था।
अगर आपने लोन लेकर शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश किया है, तो अब डिविडेंड या MF इनकम से interest expense घटाकर टैक्स नहीं बचा पाएंगे। अब पूरी इनकम टैक्सेबल मानी जाएगी, चाहे पैसा उधार लेकर लगाया हो।
पहले अलग-अलग म्यूचुअल फंड, डिविडेंड और बॉन्ड के लिए अलग-अलग फॉर्म देने पड़ते थे ताकि TDS न कटे। अब निवेशक एक ही डिक्लरेशन डिपॉजिटरी में देंगे, जो सभी इनवेस्टमेंट पर लागू होगा। इससे पेपरवर्क कम होगा।
अगर आप NRI से प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो अब TDS काटने के लिए TAN लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप अपने PAN से ही TDS deduct कर सकेंगे। इससे प्रॉपर्टी डील आसान होगी।
ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS अब 5% या 20% नहीं बल्कि फ्लैट 2% लगेगा। LRS के तहत विदेश पढ़ाई या मेडिकल खर्च भेजने पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इससे विदेश जाने वाले स्टूडेंट्स और patients को राहत मिलेगी।
अब तक कंपनियां MAT (Minimum Alternate Tax) भरने के बाद उसका credit future में adjust कर सकती थीं। 1 अप्रैल 2026 से MAT 14% फाइनल टैक्स बन जाएगा। यानी आगे MAT क्रेडिट नहीं मिलेगा। हालांकि 31 मार्च 2026 तक जमा किया गया MAT credit अभी भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
अगर armed forces का कोई member service-related डिसएबिलिटी की वजह से बाहर होता है, तो उसकी डिसएबिलिटी पेंशन पर अब पूरा टैक्स छूट मिलेगा- सर्विस पार्ट और डिसएबिलिटी पार्ट दोनों पर।
RFCTLARR Act (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून) के तहत जब सरकार जमीन जबरदस्ती लेती है और बदले में मुआवजा देती है, तो अब उस मुआवजे पर कोई टैक्स नहीं लगेगा (धारा 46 को छोड़कर)। ये नियम 1 अप्रैल 2026 के बाद होने वाले लेन-देन पर लागू होगा। इससे किसानों और ज़मीन मालिकों को साफ़ जानकारी मिलेगी और टैक्स को लेकर कन्फ्यूजन खत्म होगी।
जिन व्यापारियों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स के लिए अब आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त होगी। लेकिन नौकरीपेशा लोगों के लिए आखिरी तारीख पहले जैसी ही 31 जुलाई रहेगी।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे पर जो ब्याज मिलता है, उस पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही इस ब्याज पर स्रोत पर कर कटौती भी नहीं होगी, ताकि पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को पूरा पैसा मिल सके।
अब मालिक (एम्प्लॉयर) कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा की रकम आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख तक जमा कर दें, तो भी टैक्स में कटौती का फायदा ले सकेंगे। पहले इसके लिए सख्त समय सीमा होती थी।
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