पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड February 05, 2026, 15:47 IST
सारांश
भारत की टैक्स सिस्टम में 1 अप्रैल 2026 से बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026 में घोषित ये नियम शेयर बायबैक, म्यूचुअल फंड, टीसीएस और टीडीएस नियमों को प्रभावित करेंगे। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है।

नए वित्त वर्ष से लागू होने वाले टैक्स बदलावों को समझना हर टैक्सपेयर के लिए जरूरी है।
भारत सरकार 1 अप्रैल 2026 से टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है। इस दिन से नया 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' प्रभावी हो जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को बजट पेश करते हुए इन बदलावों की घोषणा की थी। इन संशोधनों का सीधा असर आम लोगों, व्यापारियों और शेयर बाजार के निवेशकों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से टैक्स गणना आसान होगी और नियमों का पालन करना पहले के मुकाबले सरल हो जाएगा। इसलिए चलिए एक-एक कर उन बड़े बदलावों की डीटेल समझ ले सकते हैं।
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बायबैक को लेकर है। अब तक कंपनियों द्वारा शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि को डिविडेंड माना जाता था और उस पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता था। लेकिन 1 अप्रैल 2026 से इसे 'कैपिटल गेन्स' की कैटेगरी में रखा जाएगा। इसके अलावा, फ्यूचर्स की बिक्री पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। म्यूचुअल फंड और डिविडेंड से होने वाली आय पर अब ब्याज खर्च की कोई कटौती नहीं मिलेगी, चाहे निवेशक ने निवेश के लिए कर्ज ही क्यों न लिया हो।
आम जनता के लिए टीसीएस (TCS) की दरों में कटौती एक बड़ी राहत बनकर आई है। विदेश यात्रा के शौकीनों के लिए ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस अब 5% या 20% के बजाय केवल 2% लगेगा। इसी तरह, विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर भी टीसीएस की दर घटाकर 2% कर दी गई है। टीडीएस (TDS) नियमों को भी सरल बनाया गया है। अब एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोग अपने खुद के पैन (PAN) नंबर का इस्तेमाल करके टीडीएस काट सकेंगे, उन्हें अब अलग से टैन (TAN) नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, अब सभी म्यूचुअल फंड यूनिट्स और बॉन्ड्स के लिए केवल एक बार घोषणा पत्र देना पर्याप्त होगा।
सशस्त्र बलों के उन जवानों के लिए सरकार ने बड़ी घोषणा की है जिन्हें सेवा के दौरान हुई विकलांगता के कारण रिटायर होना पड़ा है। उनकी डिसेबिलिटी पेंशन के दोनों हिस्सों (सर्विस और डिसेबिलिटी एलिमेंट) को अब पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके अलावा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे पर लगने वाले ब्याज को भी इनकम टैक्स से बाहर कर दिया गया है। जमीन के अनिवार्य अधिग्रहण (RFCTLARR एक्ट) के तहत मिलने वाला मुआवजा भी अब कुछ शर्तों के साथ टैक्स के दायरे से बाहर रहेगा, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को बड़ा फायदा होगा।
व्यापारियों और ट्रस्टों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख को 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है। हालांकि, नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समयसीमा 31 जुलाई ही रहेगी। कॉर्पोरेट जगत के लिए मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) को अंतिम टैक्स के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिसकी दर 14% होगी। नियोक्ताओं (Employers) के लिए पीएफ और ईएसआई योगदान की कटौती का दावा करने के नियम भी आसान किए गए हैं। अब वे आईटीआर फाइल करने की तारीख तक जमा किए गए योगदान पर टैक्स छूट का लाभ उठा सकेंगे।
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