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3 min read | अपडेटेड February 02, 2026, 14:48 IST
सारांश
अब Finance Bill 2026 ने इस बात को कानून में साफ तौर पर लिख दिया है। नए Income Tax Act 2025 के Section 70(1)(x) में बदलाव प्रस्तावित किया गया है। Budget Memorandum 2026 कहता है कि कैपिटल गेन टैक्स से छूट सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी जिन्होंने RBI से SGB original issue के समय खरीदा हो और उसे लगातार मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो।

Budget 2026 ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया है, बल्कि पहले से मौजूद नियम को साफ किया है।
Finance Bill 2026 के मुताबिक अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) सेकेंडरी मार्केट से खरीदे हैं, तो FY 2026–27 से मैच्योरिटी पर रिडीम करने पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट नहीं मिलेगी। इस बदलाव ने कई निवेशकों को चौंका दिया है और बाजार में काफी भ्रम भी फैल गया है। यह आर्टिकल इसी नए नियम को साफ तरीके से समझाने के लिए है।
अब तक सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGBs पर टैक्स को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं थीं। Finance Ministry इन्हें टैक्सेबल मानती थी, जबकि कई निवेशकों को लगता था कि मैच्योरिटी पर सबको छूट मिलती है। Income Tax Department के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर ने इस पर पहले ही 6 दिसंबर 2022 को Office Memorandum जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGBs टैक्स फ्री नहीं हैं।
अब Finance Bill 2026 ने इस बात को कानून में साफ तौर पर लिख दिया है। नए Income Tax Act 2025 के Section 70(1)(x) में बदलाव प्रस्तावित किया गया है। Budget Memorandum 2026 कहता है कि कैपिटल गेन टैक्स से छूट सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी जिन्होंने RBI से SGB original issue के समय खरीदा हो और उसे लगातार मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो।
CA Dr Suresh Surana के मुताबिक, अब छूट बॉन्ड पर नहीं, बल्कि निवेशक के व्यवहार पर आधारित होगी। यानी आपको ओरिजनल सब्सक्राइबर होना जरूरी है और बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड करना होगा। ये नियम RBI द्वारा जारी सभी SGB सीरीज पर एक समान लागू होगा। नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और टैक्स ईयर 2026–27 और उसके बाद के सभी वर्षों पर असर डालेगा।
अब टैक्स छूट पाने के लिए तीन जरूरी शर्तें होंगी। पहली, SGB आपको ओरिजनल इश्यू के समय RBI से लेना होगा, सेकेंडरी मार्केट से खरीदे बॉन्ड पर छूट नहीं मिलेगी। दूसरी, बॉन्ड को लगातार मैच्योरिटी तक होल्ड करना होगा। अगर आपने लॉक-इन पूरा होने के बाद भी प्रीमैच्योर रिडेंप्शन किया, तब भी टैक्स लगेगा। तीसरी, यह नियम RBI की सभी SGB सीरीज पर समान रूप से लागू होगा।
Budget 2026 ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया है, बल्कि पहले से मौजूद नियम को साफ किया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि सेकेंडरी मार्केट वाले SGBs पर टैक्स छूट नहीं मिलने की बात दिसंबर 2022 में ही स्पष्ट कर दी गई थी, यानी यह फैसला हाल की गोल्ड तेजी से जुड़ा नहीं है।
अगर आप SGB को मैच्योरिटी से पहले रिडीम करते हैं, चाहे लॉक-इन पूरा हो चुका हो, तब भी आपको टैक्स छूट नहीं मिलेगी। SGB पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स 12.5% है और इसमें इंडेक्सेशन बेनिफिट नहीं मिलेगा।
अगर आपने FY 2025–26 में मैच्योरिटी के बाद SGB रिडीम किया है, तो आपको LTCG टैक्स नहीं देना होगा, क्योंकि नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। यानी इसका असर तभी पड़ेगा जब आप FY 2026–27 या उसके बाद SGB रिडीम करेंगे और रिटर्न 2027 में फाइल करेंगे। RBI या बैंकों से खरीदे गए SGBs के टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बस शर्त यही है कि आपको बॉन्ड मैच्योरिटी तक होल्ड करना होगा, तभी कैपिटल गेन पर छूट मिलेगी।
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