पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड February 03, 2026, 16:16 IST
सारांश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए दो बड़े एलान किए हैं। अब कम या शून्य टीडीएस सर्टिफिकेट पाने के लिए ऑफिस के चक्कर नहीं काटने होंगे, यह प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। साथ ही, विदेश में अघोषित संपत्ति बताने के लिए 6 महीने की स्कीम भी लाई गई है।

बजट में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए नियमों को आसान बनाने की घोषणा की गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) पेश किया। हालांकि, इस बार के बजट में आम आदमी के लिए टैक्स स्लैब या स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन छोटे टैक्सपेयर्स (Small Taxpayers) के लिए दो बहुत ही महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। सरकार का पूरा जोर टैक्स भरने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में साफ किया कि छोटे टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए नियमों को आसान बनाया जा रहा है, ताकि उन्हें अधिकारियों के चक्कर न काटने पडें।
वित्त मंत्री ने छोटे टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव रखा है। अब तक अगर किसी टैक्सपेयर को कम टैक्स कटने (Lower TDS) या टैक्स न कटने (NIL Deduction) का सर्टिफिकेट चाहिए होता था, तो उसे असेसिंग ऑफिसर (Assessing Officer) के पास आवेदन करना पड़ता था। अधिकारी संतुष्ट होने पर ही सर्टिफिकेट जारी करता था। लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी।
वित्त विधेयक 2026 में प्रस्ताव दिया गया है कि छोटे टैक्सपेयर अब इस सर्टिफिकेट के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए एक नियम-आधारित ऑटोमेटेड बॉडी शुरू की जाएगी। यानी अब आपको किसी अधिकारी के सामने पेश होने की जरूरत नहीं होगी। इनकम टैक्स अथॉरिटी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ही आवेदन की जांच करेगी और अगर सारी शर्तें पूरी होती हैं, तो सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा।
बजट में दूसरी बड़ी घोषणा उन लोगों के लिए है जिनके पास विदेश में कोई संपत्ति या आय है, लेकिन उन्होंने अभी तक उसका खुलासा नहीं किया है। वित्त मंत्री ने छात्रों, युवा पेशेवरों, टेक कर्मचारियों और एनआरआई (NRIs) की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए एक 'फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम' (Foreign Asset Disclosure Scheme) का एलान किया है। यह स्कीम 6 महीने के लिए खुली रहेगी। इसके तहत वे अपनी अघोषित विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा कर सकते हैं और कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए एक मौका है जो किसी कारणवश अपनी संपत्ति की जानकारी देने से चूक गए थे।
इस स्कीम को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले वे लोग जिन्होंने अपनी विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा बिलकुल नहीं किया है और उनकी यह संपत्ति 1 करोड़ रुपये तक है। ऐसे लोगों को राहत पाने के लिए उस अघोषित संपत्ति की फेयर मार्केट वैल्यू का 30 फीसदी टैक्स और 30 फीसदी अतिरिक्त पेनल्टी देनी होगी। यानी कुल मिलाकर उन्हें संपत्ति की कीमत का 60 फीसदी चुकाना होगा। वहीं, दूसरी कैटेगरी में वे लोग आते हैं जिन्होंने अपनी विदेशी आय तो बताई थी और उस पर टैक्स भी दिया था, लेकिन उससे खरीदी गई संपत्ति की जानकारी देना भूल गए। अगर ऐसी संपत्ति 5 करोड़ रुपये तक है, तो उन्हें सिर्फ 1 लाख रुपये की फीस जमा करनी होगी। ऐसा करने पर उन्हें ब्लैक मनी एक्ट के तहत किसी भी तरह की पूछताछ या कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह छूट (Immunity) मिल जाएगी।
जब कोई टैक्सपेयर अपनी संपत्ति की घोषणा करेगा, तो इनकम टैक्स अथॉरिटी महीने के अंत तक उसे बताएगी कि उसे कितना पैसा जमा करना है। यह रकम आदेश मिलने के दो महीने के भीतर जमा करनी होगी। अगर किसी कारण से देरी होती है, तो दो महीने का अतिरिक्त समय भी मिल सकता है, लेकिन इसके लिए बची हुई रकम पर हर महीने 1 फीसदी ब्याज देना होगा। यह स्कीम उन मामलों पर लागू नहीं होगी जहां पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट या ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है। फिलहाल इस स्कीम की शुरुआत और अंतिम तारीख की अधिसूचना जारी होना बाकी है।
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