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Bajaj Finance Q3 Results: बजाज फाइनेंस के मुनाफे पर लगा 'प्रोविजन' का ब्रेक, रेवेन्यू उछला, समझिए इसके मायने

विकास तिवारी

2 min read | अपडेटेड February 04, 2026, 14:37 IST

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सारांश

बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का शुद्ध लाभ 2,230 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल के लगभग बराबर ही है। हालांकि, अगर एकमुश्त खर्चों और प्रोविजनिंग को हटा दिया जाए, तो कंपनी के मुनाफे में 32 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया है।

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बजाज फाइनेंस की बैलेंस शीट और एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है।

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2,230 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 2,231 करोड़ रुपये था। मुनाफे में यह स्थिरता मुख्य रूप से कुछ एकमुश्त खर्चों और बढ़ी हुई प्रोविजनिंग के कारण देखी गई है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यदि 'एक्सेलरेटेड ईसीएल प्रोविजन' और लेबर कोड चार्ज जैसे एकमुश्त झटकों को हटा दिया जाए, तो मुनाफे में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त होती और यह आंकड़ा 2,936 करोड़ रुपये के पार चला जाता।

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बिजनेस में बनी हुई है मजबूती

कंपनी का रिपोर्ट किया गया मुनाफा भले ही पिछले साल के करीब रहा हो, लेकिन इसके बिजनेस की रफ्तार काफी तेज बनी हुई है। कंपनी का कुल रेवेन्यू 24 प्रतिशत बढ़कर 39,708.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो पिछले साल 32,041.8 करोड़ रुपये था। वहीं, शुद्ध ब्याज आय (NII) में भी 19 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है और यह 13,216 करोड़ रुपये रही है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि बाजार में कंपनी के लोन उत्पादों की मांग बढ़ी है और कंपनी अपने ग्राहकों का दायरा बढ़ाने में सफल रही है। इसके साथ ही इंश्योरेंस रेवेन्यू में भी 18 प्रतिशत का उछाल आया है।

प्रोविजनिंग ने घटाया मुनाफा

बजाज फाइनेंस के मुनाफे पर इस बार लोन लॉस और प्रोविजनिंग का बड़ा बोझ देखा गया है। कंपनी ने इस तिमाही में कुल 3,620 करोड़ रुपये प्रोविजनिंग के तौर पर अलग रखे हैं, जिसमें 1,406 करोड़ रुपये का 'एक्सेलरेटेड ईसीएल प्रोविजन' शामिल है। इस बड़ी राशि को मुनाफे में से घटाने की वजह से ही अंतिम आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले लगभग बराबर ही नजर आ रहा है। यह प्रोविजनिंग भविष्य में संभावित लोन डिफॉल्ट से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो लंबी अवधि के लिए कंपनी की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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