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IND-US ट्रेड डील पर रूस का क्या रहा पहला रिऐक्शन, कहीं से भी तेल खरीदने के लिए भारत…

Upstox

2 min read | अपडेटेड February 05, 2026, 07:50 IST

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सारांश

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर रूस का पहला रिऐक्शन सामने आया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि नई दिल्ली कहीं से भी तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा।

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भारत-अमेरिका की ट्रेड डील को लेकर रूस ने क्या कहा?

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ ने बुधवार को कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला इकलौता देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये प्रोडक्ट्स खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।’

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उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बारे में पूछा गया था, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। इससे एक दिन पहले पेसकोव ने क्लियर किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या जानकारी नहीं मिली है।

निजी व्यावसायिक रेडियो स्टेशन 'कोमर्सेंट एफएम' ने इस ओर ध्यान दिलाया कि राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल के आयात को रोकने से संबंधित किसी भी समझौते का कोई उल्लेख नहीं किया। रूस के 'नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड' के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते।

क्यों भारत के लिए पूरी तरह से रूस से तेल आयात बंद करना मुश्किल?

उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, ‘अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के कैटेगरी का होता है। इसके विपरीत, रूस अपेक्षाकृत भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।’ युशकोव ने कहा, ‘रूस आमतौर पर भारत को प्रतिदिन 15 से 20 लाख बैरल तेल निर्यात करता है। अमेरिका इस मात्रा की भरपाई करने में सक्षम नहीं है। ऐसा लगता है कि ट्रंप केवल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने व्यापार वार्ता जीत ली है और समझौता पूरी तरह अमेरिकी मांगों के अनुरूप हुआ है।’

भाषा इनपुट के साथ
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