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9 min read | अपडेटेड February 06, 2026, 10:40 IST
सारांश
आरबीआई गवर्नर ने अपना संबोधन शुरू करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को काफी बेहतर और मजबूत बताया है। हालांकि, उनके भाषण के बीच बॉन्ड मार्केट में सुस्ती देखी जा रही है और वहां बियरीश यानी मंदी जैसी स्थिति बनी हुई है। बाजार अब गवर्नर के अगले बड़े संकेतों का इंतजार कर रहा है ताकि निवेश को लेकर आगे की दिशा साफ हो सके।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
10:33 AM - NBFCs और बैंकों के लिए आरबीआई के नए प्रस्ताव
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs के लिए शाखा खोलने के नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे उनके विस्तार में मदद मिलेगी। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने कुछ सुरक्षा उपायों के साथ बैंकों को रीट (REITs) को कर्ज देने की अनुमति देने का भी फैसला किया है, जिससे रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट सेक्टर में फंड का फ्लो बढ़ सकेगा।
आरबीआई गवर्नर ने संकेत दिया है कि यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील से भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को फायदा होगा। इस डील के सकारात्मक असर से भारतीय सामानों की विदेशी बाजारों में मांग बढ़ेगी।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि बैंकों में नकदी (लिक्विडिटी) डेली एवरेज आधार पर 75,000 करोड़ रुपये बनी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि दिसंबर और जनवरी के दौरान बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने के लिए आरबीआई ने ये महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। अब पहली तिमाही (Q1) के लिए वृद्धि दर 6.9% और दूसरी तिमाही (Q2) के लिए 7% रहने का अनुमान लगाया गया है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी Q1 के लिए CPI महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 4% कर दिया है। इसके साथ ही दूसरी तिमाही यानी Q2 के लिए भी महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.2% कर दिया गया है।
आरबीआई गवर्नर ने जानकारी दी है कि नई जीडीपी सीरीज आने वाली है, जिसके कारण फिलहाल वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूरे साल का जीडीपी ग्रोथ अनुमान टाल दिया गया है। गवर्नर के मुताबिक, डेटा के नए आधार और कैलकुलेशन की वजह से सटीक तस्वीर साफ होने के बाद ही भविष्य के लिए सालाना आंकड़े जारी किए जाएंगे।
आरबीआई गवर्नर ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही यानी Q4 के लिए महंगाई दर के अनुमान को संशोधित किया है। अब महंगाई दर का अनुमान 2.9% से बढ़ाकर 3.2% कर दिया गया है।
आरबीआई गवर्नर का कहना है कि कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में लगातार जारी तेजी से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को काफी मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण इलाकों में मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरों में खपत और बढ़ने की पूरी उम्मीद है, जो आर्थिक ग्रोथ के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
आरबीआई गवर्नर ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर खुशी जताते हुए बताया कि यह 723.8 अरब डॉलर के बेहद मजबूत लेवल पर पहुंच गया है। रुपये में 30 जनवरी तक का आंकड़ा 72380 करोड़ है। उन्होंने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही सेहतमंद बताया और कहा कि इतना बड़ा फंड वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए पर्याप्त है।
आरबीआई गवर्नर ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी की है। पहली तिमाही यानी Q1 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 6.9% कर दिया गया है। इसके साथ ही दूसरी तिमाही यानी Q2 के लिए भी ग्रोथ प्रोजेक्शन को संशोधित करते हुए 7% कर दिया गया है।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने साफ किया है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी यानी MPC आने वाले समय में देश के आर्थिक हालातों और मैक्रोइकॉनोमिक कंडीशंस को देखते हुए अपनी आगे की रणनीति तय करेगी। इसका मतलब है कि महंगाई और ग्रोथ के आंकड़ों में होने वाले बदलावों के आधार पर ही भविष्य में ब्याज दरों पर कोई भी नया फैसला लिया जाएगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था काफी अच्छी स्थिति में है। उन्होंने भरोसा जताया कि ग्रोथ की मौजूदा रफ्तार आने वाले समय में भी बनी रहेगी, जो बाहरी चुनौतियों के बाद भी देश के आर्थिक आउटलुक को लेकर मजबूती का संकेत दे रही है।
आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए इसे फिलहाल अनचेंज्ड यानी स्थिर रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि रेपो रेट अभी भी 5.25% पर ही बना रहेगा। पिछली कटौतियों के बाद बाजार को उम्मीद थी कि शायद इस बार भी कुछ बदलाव हो, लेकिन गवर्नर ने मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए इसे पुराने स्तर पर ही रखने का निर्णय लिया है।
आरबीआई गवर्नर ने अपना संबोधन शुरू करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को काफी बेहतर और मजबूत बताया है। हालांकि, उनके भाषण के बीच बॉन्ड मार्केट में सुस्ती देखी जा रही है और वहां बियरीश यानी मंदी जैसी स्थिति बनी हुई है। बाजार अब गवर्नर के अगले बड़े संकेतों का इंतजार कर रहा है ताकि निवेश को लेकर आगे की दिशा साफ हो सके।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा जल्द ही मॉनेटरी पॉलिसी पर अपना भाषण शुरू करेंगे। वित्त वर्ष 2026 के लिए यह छठी और आखिरी आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी है, जिस पर पूरे बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं।
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग 4 फरवरी से 6 फरवरी तक चली, जिसमें मौजूदा पॉलिसी के रुख की समीक्षा की गई। पॉलिसी के फैसलों का ऐलान आरबीआई गवर्नर 6 फरवरी को सुबह 10 बजे करेंगे, जिसके बाद दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। आप इस पूरी घोषणा को आरबीआई के ऑफिशियल चैनल्स पर लाइव देख सकते हैं। साथ में आप अपस्टॉक्स हिंदी का लाइव अपडेट्स भी पढ़ सकते हैं।
आरबीआई गवर्नर की कमेंट्री में इस बार लिक्विडिटी यानी बाजार में कैश के फ्लो को बनाए रखने वाले उपायों पर फोकस रहेगा। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार के कर्ज जुटाने के कैलेंडर को देखते हुए बाजार की नजर इस बात पर भी है कि आरबीआई आने वाले समय में सरकारी बॉन्ड की खरीद यानी OMO को लेकर क्या रुख अपनाता है, ताकि सरकार के उधारी प्रोग्राम को सहारा मिल सके।
दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट को 25 बीपीएस घटाकर 5.50% से 5.25% कर दिया था और अपना रुख न्यूट्रल रखने का फैसला लिया था। फरवरी 2025 से दिसंबर तक आरबीआई कुल मिलाकर रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर चुका है।
ब्याज दरों के अलावा आज बाजार की नजर इस बात पर होगी कि आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में नकदी यानी तरलता के प्रबंधन को लेकर क्या कहता है। पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने अलग-अलग तरीकों से बाजार में नकदी बढ़ाने की कोशिश की है। अब निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गवर्नर संजय मल्होत्रा इन उपायों को आगे भी जारी रखेंगे। सरकार के कर्ज लेने के कार्यक्रम और नए बजट के लक्ष्यों को देखते हुए आरबीआई का यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।
हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 और भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते ने देश की आर्थिक संभावनाओं को नई ऊर्जा दी है। ऐसे में आरबीआई की मौद्रिक नीति इन बड़े फैसलों के साथ तालमेल बिठाने का काम करेगी। दिसंबर में जब आरबीआई ने दरों में कटौती की थी, तब अपना रुख बदलकर 'न्यूट्रल' कर लिया था। आज की बैठक के बाद यह साफ हो जाएगा कि आरबीआई अपनी इसी न्यूट्रल नीति पर कायम रहता है या फिर भविष्य में और कटौती के संकेत देता है। अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल होम लोन या कार लोन की ईएमआई में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है।
आम आदमी के लिए आरबीआई की यह नीति सीधे तौर पर उसकी जेब से जुड़ी होती है। अगर रेपो रेट स्थिर रहता है, तो बैंक भी अपनी उधारी दरों में ज्यादा फेरबदल नहीं करेंगे। वहीं शेयर बाजार के निवेशकों के लिए गवर्नर का बयान भविष्य की दिशा तय करेगा। खासतौर पर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर आज आरबीआई के फैसलों का गहरा असर देखने को मिल सकता है। सुबह 10 बजे होने वाले संबोधन के बाद बाजार की चाल और देश की आर्थिक रफ्तार की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
शेयर बाजार और बैंकिंग क्षेत्र के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है और उम्मीद की जा रही है कि इसे इसी स्तर पर बरकरार रखा जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक कुल 1.25 प्रतिशत (125 बेसिस पॉइंट) की कटौती रेपो रेट में की है। पिछली दिसंबर की बैठक में भी केंद्रीय बैंक ने दरें 0.25 प्रतिशत कम की थीं। फिलहाल विकास और महंगाई का तालमेल सही बना हुआ है, इसलिए आरबीआई अभी 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपना सकता है।
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