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3 min read | अपडेटेड January 27, 2026, 09:15 IST
सारांश
मंगलवार को भारतीय और वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मुनाफावसूली के कारण चांदी की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई। रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा काटने से बाजार में यह नरमी देखने को मिली है।

Gold Rate Today: सोने की कीमतों में आई गिरावट
वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। वहीं MCX पर 27 जनवरी की सुबह बुलियन बाजार में ज़बरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां सोना 2522 रुपये या 1.62% उछलकर 1,58,559 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा, जबकि दिन का दायरा 1,57,500 से 1,59,820 रुपये रहा और इसने अपने लाइफटाइम हाई 1,59,820 को छू लिया। वहीं चांदी ने और भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 19,831 रुपये या 5.93% की बड़ी छलांग लगाई और 3,54,530 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, दिन का लो 3,39,824 और हाई 3,54,780 रुपये रहा, जो इसका अब तक का सर्वोच्च स्तर भी है।
बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली के कारण आई है। पिछले कुछ समय से लगातार रिकॉर्ड बना रही चांदी आज 7 प्रतिशत से ज्यादा टूट गई। निवेशकों ने ऊंचे भाव पर बिकवाली की जिससे कीमतों में अचानक कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमैक्स पर सोने की कीमत 1.16 प्रतिशत गिरकर 5,023.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। हालांकि अच्छी बात यह है कि सोना अभी भी 5,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना हुआ है।
चांदी की बात करें तो इसमें आज सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 117.71 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन आज इसमें 6.41 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 108.09 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। एक्सपर्ट का मानना है कि इतनी बड़ी तेजी के बाद कीमतों में थोड़ा सुधार होना स्वाभाविक था। चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन लोगों के लिए मौका हो सकती है जो नए निवेश की योजना बना रहे हैं।
इस साल की शुरुआत से ही सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी रही है। अब तक सोने के दाम करीब 17 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। निवेशकों का सरकारी बॉन्ड और मुद्राओं से भरोसा कम होना, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सोने को सुरक्षित निवेश का जरिया बना दिया है। यही वजह है कि गिरावट के बावजूद सोने की मांग बनी हुई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का सोने के प्रति मोह कम नहीं हुआ है। साल 2025 में कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद भी केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी जारी रखी है। वर्तमान में वैश्विक आधिकारिक भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि दुनिया भर की सरकारें अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सोने पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही हैं।
सोने की कीमतों पर डॉलर की चाल का सीधा असर पड़ता है। अमेरिकी डॉलर फिलहाल अपने चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस साल अब तक डॉलर में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 97.05 के स्तर पर है। सोमवार को यह 96.80 के स्तर तक गिर गया था। डॉलर की इस कमजोरी ने ही सोने को निचले स्तरों पर सहारा दिया हुआ है। यूरो और स्टर्लिंग जैसी मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले स्थिर बनी हुई हैं।
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