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फाइनेंस बिल सरकार की ओर से पेश वह दस्तावेज है, जिसमें नए टैक्स लगाने या मौजूदा टैक्स में बदलाव का पूरा विवरण होता है।
जब सरकार का कुल खर्च उसकी कमाई (राजस्व) से ज्यादा हो जाता है, तो उस अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं।
एक साल में देश की सीमा के भीतर तैयार सभी वस्तुओं और सेवाओं की कुल वैल्यू को जीडीपी कहते हैं, यह देश की तरक्की का पैमाना है।
डायरेक्ट टैक्स किसी व्यक्ति या संस्था की आय पर सीधे लगता है, जैसे इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स।
इनडायरेक्ट टैक्स सामान खरीदने या सेवाओं के इस्तेमाल पर लगता है, जैसे जीएसटी (GST), जिसे ग्राहक अप्रत्यक्ष रूप से चुकाता है।
जब सरकार अपनी किसी कंपनी (PSU) का कुछ हिस्सा बेचकर फंड जुटाती है, तो उसे विनिवेश कहा जाता है।
देश की सीमा के पार होने वाले कुल आयात और निर्यात के बीच का अंतर 'करेंट अकाउंट डेफिसिट' कहलाता है।
विदेशों से आने वाले (आयातित) सामान या यहाँ से बाहर जाने वाले सामान पर लगने वाले टैक्स को कस्टम ड्यूटी कहते हैं।
बॉन्ड एक तरह का कर्ज का एक सर्टिफिकेट है। सरकार या कंपनियां बाजार से पैसा जुटाने के लिए इसे जारी करती हैं, जिस पर निवेशकों को ब्याज मिलता है।
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