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Bank Strike: बैंक हड़ताल से मध्यप्रदेश में ₹3,000 करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 27, 2026, 15:24 IST

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सारांश

Bank Strike: मध्यप्रदेश बैंक एम्प्लॉयीज एसोसिएशन (एमपीबीईए) के चेयरमैन मोहनकृष्ण शुक्ला ने बताया कि सूबे के कुल 8,217 बैंक ब्रांचों में से लगभग 7,000 ब्रांचेज के करीब 16,000 कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए।

बैंक हड़ताल

मध्य प्रदेश में बैंक हड़ताल से 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित

Bank Strike: बैंकों में फाइव डे वर्किंग वीक को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की मंगलवार को बुलाई गई पूरे देश में हड़ताल के दौरान मध्यप्रदेश में करीब 7,000 ब्रांचों में काम-काज ठप रहा, जिससे 3,447 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ने यह जानकारी दी है। मध्यप्रदेश बैंक एम्प्लॉयीज एसोसिएशन (एमपीबीईए) के चेयरमैन मोहनकृष्ण शुक्ला ने बताया कि सूबे के कुल 8,217 बैंक ब्रांचों में से लगभग 7,000 ब्रांचेज के करीब 16,000 कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए। इनमें 12 सरकारी बैंकों के साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और सहकारी बैंकों के कर्मचारी शामिल हैं।

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बैंकों में कौन-कौन सी सर्विसेज रहीं बंद?

उन्होंने बताया कि हड़ताल से बैंक ब्रांचों में नकदी जमा करने और निकालने के साथ चेक निपटान, सावधि जमा (Fixed Deposit, FD) योजनाओं का नवीनीकरण, सरकारी खजाने से जुड़े काम, प्रशासनिक कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। शुक्ला ने कहा, ‘केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न ऑफिसों के साथ ही फाइनेंशियल सेक्टर के कई शासकीय और निजी संस्थान शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लिहाजा बैंकिंग सेक्टर में भी फाइव डे वर्किंग वीक लागू किया जाना चाहिए।’ क्योंकि 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को बैंक बंद रहे थे, इसलिए मंगलवार की हड़ताल के कारण लगातार तीन दिनों तक ब्रांच लेवल की सर्विसेज बाधित रहीं। अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले नौ संगठनों के संयुक्त निकाय यूएफबीयू द्वारा हड़ताल का यह आह्वान 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक के विफल होने के बाद आया था। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने कहा कि मार्च 2024 में वेतन संशोधन समझौते के दौरान इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और यूएफबीयू के बीच सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने पर सहमति बनी थी।

क्यों फाइव डे वर्किंग से घंटे नहीं होंगे कम?

उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार हमारी वाजिब मांग पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। इससे काम के घंटों का कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि हम सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमत हुए हैं।' यूएफबीयू के एक अन्य घटक नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (एनसीबीई) के महासचिव एल चंद्रशेखर ने कहा, 'यह आंदोलन ग्राहकों के खिलाफ नहीं, बल्कि एक टिकाऊ और मानवीय बैंकिंग सिस्टम के लिए है। फाइव डे बैंकिंग कोई विलासिता नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय आवश्यकता है।'

PTI इनपुट के साथ
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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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